आसीरबाद
दिसम्बर के महीना,साँझ के लगभग चार बजत होइ! हम नानी से कहनी –आज बुध के दिन ह।गजराजगंज में आज बाजार लागल होइ ,एह से हम जा तानी कुछ तरकारी लेले आवे।बाजार ह एह से तरकारी ताजा मिली आ कुछ सस्ता भी ।
नानी सूप में तीसी फटकत रहे। हमार बात सुन के कहलस –सोचनी हा कि तहरा खातिर मेथी बान्हि दिहीं।दिली-बम्बे रहे के बा ओहिजा कहाँ मिलत होइ इ सब।बड़ा भाग से त आइल बाड़ ।बाजारे जा तार त दू किलो गुड़ ले लिह आ जवन तरकारी पसन्द परी तवन ले लीह ।फ़ेर कुछ सोच के कहलस –बबुआ तहरा लिट्टी बड़ा निमन लागेला।घरे सातू(सत्तू) बा,आज तहरा खाये खातिर लिट्टी लगा दे तानी।एह से तनी हरियर मरचाई आ आदी(अदरख) ले ले अइह।
ठीक बा नानी –कहके हम झोला लेके बाजारे चल देनी।गजराजगंज बाजार घरे से आधा कोस जमीन परेला।गाँव से बहरी निकलनी त देखनी कि हमरा आगे-आगे एगो बूढ़ आदमी लाठी लेले गते-गते चलल जाता। बाल पाक के एकदम सन नियन उजर,कुरता पीठ प तीन जगह फ़ाटल जवना प पेवन लागल रहे आ ओह पेवन में छेद भइल रहे। चश्मा दूनो कमानी भिरी से कपड़ा के डोरी बना के बान्हल रहे। गोड़ में एगो खियाइल हवाई चप्पल । हमरा से पीछे से ना चिन्हाइल कि कवन आदमी ह । हम आपन चाल बढ़ा देनी आ ओह आदमी से आगे निकल अइनी।आगे आके जब पीछे मुड़ के देखनी त हमरा मुँह से निकल गइल- भरत बाबा?
उ आदमी हमरा से आपन नाम सुन के ओहीजे खड़ा हो गइले आ आपन चश्मा के सीसा में से हमरा के पहिचाने के कोसिस करे लगले।देखनी उनका ललाट पर तीन गो रेखा बन आइल। बाकिर बुढ़ापा के कमजोर नजर के चलते उ हमरा के ना चिन्ह पइले।हम उनकर दूनो गोड़ छू के प्रणाम कइनी।
बनल रह बबुआ। हमेसा आगे मुँहे बढ़ ।भगवान तहरा के बढ़न्ति देस ……।बाकिर बबुआ हम तोहरा के चिन्ह ना पवनी।
भरत बाबा से एके साथे तीन गो आसीरबाद पाके पता ना मन में एगो अजीब संतोष नियन बुझाइल। बाबा तू त ना चिन्हल बाकी हम तहरा के चिन्हतानी नू। हम तहार दीपक ।उहे दीपक जवना खातिर तू रोज अपना बगइचा में से अमरुद ले आवत रह । आ समूचा बधार हम तहरे कान्ह प बइठ के त घूमल बानी।
बड़ा जोर से हँसले भरत बाबा आ कहले –आरे बउराह,तोरा के हम कइसे भुला जाइब।तनी नजर कम हो गइल बा बबुआ।अउर कह कइसन बाड़? कहाँ बाड़ आज काल्ह ?सुननी हा कि सरकारी नोकरी में बाड़ !
हम धीरे-धीरे भरत बाबा साथे बतियावत आगे बढ़े लगनी।उनकर बात के जबाब देनी-हँ बाबा,सरकारी नोकरी में ही बानी।एह घरी दिल्ली में बानी।
कवना विभाग में बाड़ बबुआ?
बाबा एविएसन में इंजिनियर बानी। देखनी कि बाबा के माथ प बल पर गइल।बुझला एविएसन ना बुझाइल उनका।फ़ेर हम उनका के समझावे के लहजा में कहनी-बाबा हवा में जवन जहाज उड़ेला नू,ओकरे में हम इंजिनियर बानी।माने कि ओह जहाज के बनाइला।बुझाइल कि एह बेर हमार बात उनका बुझा गइल ।
वाह बबुआ बहुत निमन ,बनल रह । मन खुश हो गइल सुन के। छुट्टी आइल बाड़ बबुआ?
हँ बाबा, नानी एहिजा अकेले नू बाड़ी ।एह से आके देख जाइला।माई कै बार नानी के कहलस कि ओकरा साथे शहर में चल जास ।बाकिर नानी जाये के तेयार नइखी।कहेली कि हमार अपने सै बिगहा खेत बा ,ओकरा के छोड़िके बेटी किहाँ ना जाइब ।एह से हमहीं जब छुट्टी मिलेला त आ जाइला नानी के देखे खातिर ।
हँ बबुआ,जबले तहार नाना जिंदा रहले हा तबले उनका भीरी जात रहीं जा।बड़ा निमन आदमी रहले हा । जबसे उ एह दुनिया से गइले तब से हमनियों के तहरा दुआर प जाइल कम हो गइल।बेचारी तोर नानी अकेलहीं नू बाड़ी।कबो-कबो आदमी जाला ओहिजा,बाकिर मन भर उठेला ।जवन दुआर कबो गह-गह करत रहे अब भांय- भांय करेला।
बाबा एहिसे हमहुँ चल आइला ।काहे कि हमार जनम करम त सब एहिजे नू भइल बा।तनि नानी के भी मन दोसर हो जाला।
बहुत निमन करेल बबुआ ,तहरा नाना के त तहार माई एके बेटी रहली हा ।दोसर केहु त हइयो नइखे ।तु ना देख-रेख करब अपना नानी के त के करी। आ पइसा के कवनो कमी नइखे तहरा नानी के ।तहार नाना बहुत अरज के गइल बाड़े।
हम भरत बाबा के बात बड़ी ध्यान से सुनत रहीं आ रस्ता प उनका साथे आगे-आगे चलल जात रहीं।उ आगे कहे लगले- बबुआ बड़-बूढ़ के सेवा कइल बड़ा निमन ह आ खूब आसीरबाद मिलेला । आ जान जइह नू बबुआ जब बड़-बूढ़ के आसीरबाद कपार प रही नू त तहार जहाज कबो ना मराई।कवनो आन्ही-तूफ़ान में रहि उ ओहीजा से निकल आई।एह से जतना लोग तहरा से बड़ होखे उनकर आसीरबाद लेबे में पीछे मत रहीह आ अपना नानी के मन से सेवा कर बबुआ।
भरत बाबा के इ बात हमरा मन में उतरत चल गइल।फ़ेर बाजार भइल आ हमनी के तरकारी लेके ओसहीं हाल समाचार बतियावत घरे आ गइनी जा। मामा किहाँ से हम कुछ दिन रह के वापस नौकरी प दिल्ली आ गइनी।
दिल्ली आके ह काम में लाग गइनी। कुछ दिन बीत गइल।हमरा नौकरी के काम से डिपार्टमेंट के जहाज से ही पुणे जाये के रहे।सबेरे आठ बजे जहाज पुणे खातिर उड़ल ।जहाज में तीन गो पायलट आ दू गो हमार साथे काम करे वाला लोग रहे।जहाज उड़ला आधा घंटा भइल होइ आ जहाज लगभग पंद्रह हजार फ़ीट के हाइट प लेबल फ़्लाइंग करत रहे।सोचनी कि कुछ नाश्ता कर लिहीं काहे कि जहाज के पुणे पहुँचे में एक घंटा और लागी।जइसे ही हम आपन बैग खोले खातिर बढ़नी अचानक हमरा जोर के झटका लागल आ हम जहाज के फ़र्श पर गिर पड़नी।कुछ सोचे के समय ना मिलल काहे कि जहाज एक तरफ़ से झुक गइल रहे आ तेजी से जमीन के ओर गिरत रहे। छाती आटा मिल के मशीन नियन जोर-जोर से धड़कत रहे। मन सन्न रह गइ आ देह में बुझाइल कि जान नइखे। जहाज के एगो इंजन शायद धीरे-धीरे बंद होत रहे आ उ तेजी से जमीन के ओर गिरल जात रहे। इ त बुझा गइल कि अब जान ना बाँची ।बहुत ढेर होइ त दू से तीन मिनट ।साँच कहीं त अब इहे बुझात रहे कि कइसे माई-बाबूजी के मुंह एक बेर देख लेतीं।सब देवी-देवता लोग के रुप आँख के सोझा नाचे लागल । हमरा साथे जे भी रहे ओकर हालत उहे रहे जवन कि हमार। जहाज तेजी से जमीन के ओर गिरल जात रहे आ हमार आँख भी अब मुँदाइल जात रहे।इहे लागत रहे कि जहाज अब जमीन से टकराई आ हमनी के माँस के लोथड़ा बन जाइब जा।सबसे अन्त में याद परल भरत बाबा के बात जवन कि कान में गूँजे लागल- आ जान जइह नू बबुआ जब बड़-बूढ़ के आसीरबाद कपार प रही नू त तहार जहाज कबो ना मराई। एकाएक जहाज में फ़ेर झटका लागल आ जहाज के जमीन के तरफ़ गिरल रुक गइल आ फ़िर जल्दी से ऊपर उठे लागल। जइसे ही जहाज सीधा भइल हम काकपिट के तरफ़ भगनी ।जमीन से जहाज के बीच लगभग सात हजार फ़ीट के दूरी रह गइल रहे।देखनी कि पायलट लोग के चेहरा पर भी हवा उड़त रहे आ रेडियो संपर्क पर बात चलत रहे-
टावर कंट्रोल, वी आर कमिंग टू बेस……
एवरीथिंग नार्मल सर…
नो…,इट्स एन इमर्जेंसी…
हमरा सबकुछ समझ में आ गइल ।जहाज के दू गो इंजन में से एगो इंजन में खराबी आ गइल रहे आ उ बंद हो गइल रहे।एह समय जहाज एक इंजन पर ही उड़त रहे। हमार देह काँप उठल इ सोच के कि कहीं दोसरका इंजन मत बंद होखे।जतना भगवान होले हम सब के गोहरावे लगनी।अब भी कान में भरत बाबा के आवाज़ गूँजत रहे- आ जान जइह नू बबुआ जब बड़-बूढ़ के आसीरबाद कपार प रही नू त तहार जहाज कबो ना मराई।
भगवान के नाम लेत लेत आखिर जहाज सही सलामत वापस बेस में लैंड कर ही गइल।जब जहाज से बाहर निकलनी तब बुझाइल कि दोसर जनम भइल बा ।आँख के कोर से लोर पोंछ्नी जवन कि पता ना कब आँख से बह आइल रहे। सब लोग के चेहरा जिंदा लौटला के खुशी रहे बाकिर ओह दर्द के निशानी अभी तक ना मिट पाइल रहे जवन कि कुछ देर पहिले मिलल रहे। हम पायलट के धन्यवाद कहे गइनी।
थैंक्स…सर्…
फ़ोर व्हाट?
फ़ोर सेविंग आवर लाइफ़ सर्।
से थैंक्स टू गोड,ही इस ओन्ली सुपर मोस्ट पाइलट्………
हमार जान में जान आइल ।भगवान जी के धन्यवाद देनी। आ मन में भरत बाबा के आवाज सुनाई पड़त रहे-। आ जान जइह नू बबुआ जब बड़-बूढ़ के आसीरबाद कपार प रही नू त तहार जहाज कबो ना मराई।
आ जान जइह नू बबुआ जब बड़-बूढ़ के आसीरबाद कपार प रही नू त तहार जहाज कबो ना मराई।
-सुस्मित सौरभ
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